MAHESHWARI RITI RIWAS
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MAHESHWARI RITI RIWAS

Devi Devtaon ke Geet

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देवी देवताओं के गीत

ganesh
hanuman
शीतला-माता""
करणी-माता-1

विनायक :

किसा नगर स्यूं आइया ओ बाबा दूंदाळा
कोई घर कुणाजी र जाय
रिध सिध करो विनायक ढूंदाळा ।।
रणत भंवर स्यूं आइया ओ बाबा दूंदाळा
कोई घर श्रीरामजी र जाय
म्हार घर आवो विनायक ढूंदाळा ।।
ऊंचा घालुं बेसणा ओ बाबा दूंदाळा
कोई दूध पखाळांजी पांव
रिध सिध करो विनायक दूंदाळा।।
चावल रांधू ऊजळा ओ बाबा दूंदाळा
कोई हरीय मूंगा री दाल
म्हार घर आवो विनायक ढूंदाळा ।।
पोळी पोवुं लचलची ओ बाबा
दूंदाळा कोई तेवण तीस बत्तीस
रिध सिध करो विनायक दूंदाळा ।।
घी बरताऊं तोलणो ओ बाबा दूंदाळा
कोई असल जालापुर री खांड
म्हार घर आवो विनायक ढूंदाळा ।।
केर करेला सो तळू ओ बाबा दूंदाळा
कोई पापड़ तळं ए पचास
रिध सिध करो विनायक ढूंदाळा ।।
गादी ढ़ालूं रेशमी ओ बाबा दूंदाळा कोई फूलड़ां जड़यो बाजोट
म्हार घर आवो विनायक ढूंदाळा ।।
थाल परोस पदमणी ओ बाबा दूंदाळा कोई नेवर री झीनकार
रिध सिध करो विनायक ढूंदाळा ।।
जीम्या जूठ्या रुच रिया ओ बाबा दूंदाळा
कोई इमृत चलू रे कराय
म्हार घर आवो विनायक ढूंदाळा ।।
सामली साळ दियो जग ओ बाबा दूंदाळा
कोई बैठो ढूंद पसार
रिध सिध करो विनायक ढूंदाळा ।।

बालाजी :

कठोड़ तो बाजा ओ बजरंग बाजिया
कठोड़ तो घूरया छ निशान
हुकम करो तो म्हे आवां थार देवरे । (1)
(जसवन्तगढ़) तो बाजा ओ बजरंग बाजिया देवरा में घूरया छ निशान
गहरो नगारो सालासर घुर रयो। (2)
सूरज सामो बालाजी थारो देवरो
धजा ए फरूक असमान
सांच साहब रो जी बंगलो हद बण्यो। (3)
चढ़न चढ़ाव बालाजी थांर चूरमो और चोट्यांला नारेल
लाल लंगोटो जी तिलक सिंदूर रो। (4)
घनश्यामजी जात बालाजी थांर आयसी, ले बेटा पोता न साथ
हुकम करो तो म्हे आवां थार देवर। (5)
(परिवार सदस्यों के नाम क्रम से लेना)
बजरंगलालजी जात बालाजी थांर आयसी, ले भाई रे भतीजा री जोड़
हुकम करो तो म्हे आवां थार देवर। (6)
(परिवार सदस्यों के नाम क्रम से लेना)
सासु बहूवां जात बालाजी थांर आयसी
देवर जेठाण्या, जात बालाजी थांर आयसी
नणद भोजायां जात बालाजी थांर आयसी
ले गोद, झडूल जी पूत
हुकम करो तो म्हे आवां थार देवर। (7)
चढ़ न चढ़ाव बालाजी थांरे चूरमो ओर चोट्यांळा नारेल
अंजनी रो पूत आयोध्या म रम रयो। (8)

श्यामजी :

धन खाटू धन सांवळा श्यामजी
जीयो प्रभु धन रे ढूंढ्याला लोग
धजा बन सांवळा श्यामजी। (1) सूरज सामो हर रो देवरो श्यामजी
जीओ प्रभु धजा ए फरूक असमान धजा बन सांवळा श्यामजी। (2)
चढ़न चढ़ाव हर रे, चूरमो श्यामजी जीओ प्रभु और चोट्यांळा नारेल
धजा बन सांवळा श्यामजी । (3)
महावीरप्रसादजी री गाड़ी हंकी श्यामजी
(परिवार के अन्य सदस्यों का क्रम से नाम लें)
जीओ प्रभु सूरजमलजी से परिवार
(सदस्य के पिता का नाम लें)
धजा बन सांवळा श्यामजी। (4)
जात तो आव हर र दूर रा श्यामजी
जीओ प्रभु जातीड़ा री आशा मनस्या पूर
धजा बन सांवळा श्यामजी। (5)

माताजी :

डूंगर स्यूं माताजी ऊतरी माता हाथ कलश ले साथ हिवड़ री रेख म्हार मन रळी ।। (1) माता को मंड जी सांकड़ो माता जातिड़ा रो बड़ो परिवार
हिवड़ री रेख म्हार मन रळी ।। (2) और चिणाव मंड मोकळा माता बधज्यो थारी जातीड़ा री बेल
हिवड़ा री रेख म्हार मन रळी।। (3)
नो गज नींव दिरायस्यां हिवड़ री रेख म्हार मन रळी।। (4)
घी भर दिवलो जोयस्यां लापसी रो भोग लगायस्यां
हिवड़ री रेख म्हार मन रळी।। (5)
सोने री ईंट थपायस्यां सीरा रो भोग लगायस्यां दूंधा री मसक ढुलायस्यां
सोना रो छतर चढ़ायस्यां हिवड़ री रेख म्हार मन रळी।। (6)
लिखो बाई भगवती न सासर थार बाबुल घर आनन्द उछाव
हिवड़ री रेख म्हार मन रळी।। (7) भाई तो ओढ़ासी थांन चुन्दड़ी
भावज लूळ लूळ लागेली पांव
हिवड़ री रेख म्हार मन रळी।। (8) बाई थे तो मुड़ मुड़ देवो आशीषड़ी
हिवड़ री रेख म्हार मन रळी ।। (9)

पितरजी :

उतर दिखण स्यूं ओ गांधी को आयो
आय उतरियो हरिये बड़ तळ
आवो गांधी का जी, ओ बैठो गांधी का
तोल गांधी का बेटा किस्तूरी।।
काहे री डांडी जी ओ काहे रा तोळ,
तोले गांधी का बेटा किस्तूरी
सोने री डांडी जी ओ रूपे रा तोळा
तोले सौदागर गांधी किस्तूरी।।
ओ कुणजी मुलाव, जी ओ कुणजी तुलाव
तोल गांधी का बेटा कस्तूरी
डूंगरमलजी मुलावजी ओ तुलसीरामजी तुलाव
सांचे पितरां र कस्तूरी अंग चढ़।।
शिवरतनजी मुलावजी ओ, विश्वनाथजी तुलाव
सांच पितरां र केसर अंग चढ़।।
छोटी सी तळाई जी ओ पाना फूलां छाई
आयो पितरां रो लश्कर न्हाय गयो
न्हाया देवी-देवता जी ओ पितर संतोकिया
ओज्यूं ए तळाई म पाणी अन्तघणो ।। छोटो सो बुगचोजी ओ कपड़ां स्यूं भरियो
आयो पितरां रो लश्कर पेहर गयो पेहरया देवी-देवता जी ओ पितर संतोकिया
ओजूं ए बुगचा में कपड़ा अन्तघणा।। छोटी सी बाटकड़ी जी ओ कुंकुं केसर घोलिया
आयो पितरां रो लश्कर चिरचिरयो
चिरया देवी-देवता जी ओ पितर संतोकिया
ओजूं ए बाटकड़ी में केसर अंतघणी।। छोटो सो एक डब्बो जी ओ, गेणां स्यू भरियो
आयो पितरां रो लश्कर पेहर गयो पेहरया देवी-देवता जी ओ पितर संतोकिया
ओजूं ए डब्बा में गेहणा अन्तघणा।।
छोटी सी कढ़ाई जी ओ लापसड़ी रंधाई
आयो पितरां रो लश्कर जीम गयो
जीम्या देवी-देवता जी ओ पितर संतोकिया
ओजूंए कढ़ाई में भोजन अंतघणा।।
चौदस क दिन आयज्यो जी ओ अमावस के दिन जाईज्यो
म्हारी बाड़ी री बेल बधाईज्यो
भूखा भूखा आयज्यो जी ओ धाया-धाया जायीज्यो
थारी सेवगां रो वंश बधाईज्यो ।।
कुणाजी रा बेटा जी ओ कुणाजी रा पोता
किसड़ी मायड़ उदर लोटिया
बाबाजी रा बेटा जी ओ दादाजी रा पोता
माता लक्ष्मी (सुगनी) र उदर लोटिया ।।
धन थांरी माता जी ओ धन थांरा पिता
धन ए घिराडी माता थे जणिया
जाता म्हारा पितरजी देवो नी आशिषां ।।
फलज्यो नारेळां, लड़लूमज्यो,
दूब पसरज्यो राजा पाना फूलज्यो
फळज्यो फळज्यो नारेल लड़लूमज्यो ।।

भैरुंजी :

थांरी तेलण छू जी महाराज
तेल घड़ो ले घर आई ओ मालासी रा भैरु
थे म्हारी नींद गुमाई, नींद गुमाई
आशा मनशा पुराओ ओ महाराज।।
दूर देशां री जातण आई ओ कुचिपुरा रा भैरु
थे म्हारी नींद गुमाई, नींद गुमाई
आशा मनशा पुरावो ओ महाराज।।
थारी कनोयण छू जी महाराज
लाडूड़ां री छाब ले घर आई ओ महाराज
एक हालरिया की खातर आई ओ मालाशी रा भैरुं थे म्हारी नींद गुमाई, नींद गुमाई
आशा मनशा पुरावो ओ महाराज।।
दूर देशां री जातण आई ओ कुचिपुरा रा भैरूं
थे म्हारी नींद गुमाई, नींद गुमाई
आशा मनशा पुरावो ओ महाराज।।
थारी मोढ़ण छू जी महाराज, सुरंगी सी चूनड़ ले घर आई
बायला री बायां, पगाएं उबाणी जातण आई ओ महाराज
थे म्हारी नींद गुमाई, नींद गुमाई
आशा मनशा पुरावो ओ महाराज।।

धान रोळणा :

धान रोळ, धान रोळ जी कुलबहुवां
कन्हैयालालजी री कुल बहु धान जी रोळ
ज्योतिप्रसादजी री सायधन धान जी रोळ
रामनारायणजी री बेन्हड़ धान जी रोळ

घी पिलाना :

घी पी रे, म्हारा बाळक बनड़ा, घी पी रे ।
थारी दादी पाव (बडिया पाव), (मायड़ पाव), डोर हिलाव
हमसे रड़ियां रामपुराव
मजीरा बाज, घी गुड़ गाज, बैला शब्द सुणाव
पाड़ोसण सरीसा घुरया नगाड़ा,
नानक जानी जान चढ़ेला, घी पी रे।।
थारी बागां में उतरली जान
रायजादा बनड़ा घी पी रे।।
थारी घणी रे हबोळ चढ़सी जान
रायजादा बनड़ा घी पी रे।।
(काकी, भाभी, मामी, मासी सभी का नाम लेना)

पीठी चढ़ाना :

भगवतीप्रसादजी पूछ बालमिया
थारी चूनड़ चीकट क्यूं रे हुई
रायजादा र तेल चढ़ावतड़ा
म्हारी चूनड़ चीकट यों रे हुई ।।

पीठी उतारना :

माधोप्रसादजी पूछ बालमियां
थारी चूनड़ चीकट क्यूं रे हुई
रायजादे र तेल उतारतड़ां
म्हारी चूनड़ चीकट यों रे हुई ।।

झोळ घालणा :

दादाजी झोळ झिकोळ जी
दादीजी मसळ न्हुवाव जी
(बाबा, पिता, काका का नाम लेना)

पीठी (बनड़ी 1) :

म्हारी हळदी रो रंग सुरंग, निपज मालवे
मुलाव लाडलड़ी रा दादोजी, दाद्यां र मन रळ
थारी दाद्यां र मन कोड, कोड घणों कर।। बनड़ी पीठड़ली दिन चार, मळमळ मसळल्यो
बनड़ी काजळिया दिन चार, नैण घुळायल्यो
बनड़ी मेहंदळी दिन चार, हाथ रचायल्यो
बनड़ी चावळीया दिन चार, रूच रूच जीमल्यो।। बनड़ी न्हाय धोय बैठी बाजोट, सदा ए सुहावणी
लाडली, कांई मांग गळहार, कांई दांत्यो चूड़लो
म्हैं तो भल मांगु गळहार, भळ दांत्यो चूड़लो
म्हैं तो परणू साजनीया रा जोध, बे म्हार सीग चढ़।।

पीठी (बनड़ा) :

म्हारी हळदी रो रंग सुरंग, निपज माळवे
मुलाव लाडलड़ा रा दादोजी, दाद्यां रे मन रळ
थारी दाद्यां रे मन कोड, कोड घणो कर ।। बनड़ो, न्हाय धोय बैठो बाजोट, सदा सुहावणो
लाडला, काई मांगो सिर पाग, कांई सिर रो सेवरो
म्हैं तो, भल मांगू सिर पाग, भल सिर रो सेवरो
म्हैं तो, मांगूं साजनीय री धींव, बा म्हार सीग चढ़।।
बनड़ा, तोरण तारां री छांव, क्यूं कर बांधस्यो
म्हार सिमरथ दादोजी साथ, भळभळ बांधस्यां
बनड़ा, बनड़ी है इदक सरूप, क्यूं कर निरखस्यो
म्हार गेणां रो डब्बो जी हाथ, भळ भळ निरखस्यां
बनड़ा, सासु है इदक सरूप क्यूं कर भेंटस्यों
म्हारी सासु न सात सिलाम, भळभळ भेंटस्यां ।।

पीठी ( बनड़ी - 2 ) :

गेहूं ए चीणा रो उबटणू, राय चम्पेली रो तेल, रायजादी बैठी उबटण
आवो म्हारा दादाजी निरखल्यो,
आवो म्हारा बाबाजी निरखल्यो थां निरख्यां सुख होय, रायजादी बैठी उबटण
(इसी तरह, बापूजी, काकाजी, बीराजी सभी का नाम लेना)

पीठी (बनड़ी - 3 ) :

सुण सुण रे बिकाण रा तेली, थारी घाणी तेल में चमेली
मांय घालुं मरवो ने मोगरो, मांय घांलु केशर ने कस्तूरी
मांय घालुं जायफळ न जावतरी, ओ तेल नवल बनी र अंग चढ़सी
दमड़ा म्हारा दादोजी भल देय, लेखो म्हारी दादीजी कर लेय
(इस तरह, बाबा, बाप, काका, बीरा सभी का नाम लेना)

नहाना (बनड़ी) :

न्हाय ले लाडली न्हाय ले ओ, थार पगल्यां रे हेठ गंगा बेव
जठ म्हारी बाळक बनड़ी न्हायसी ओ, बठ सूरजजी बहू रेणादे पधारसी
जठ म्हारी बड़परवारी न्हायसी ओ, बठ गजाननजी बहू रिद्ध सिद्ध दे पधारसी
सूरजजी र ओढ़ण पीळी पागड़ी ओ, राणी रेणादे जतन घणा कर
गजाननजी र ओढ़ण पीळी पागड़ी ओ, राणी रिद्ध सिद्ध दे जतन घणा कर
आवो देवता करो ए बधावणा जी, म्हार आज रो दिन रळी आवजो
न्हाय ले लाडली न्हाय ले ओ, थार पगल्यां रे हेठ गंगा बेव ।।
जठ म्हारी दादाजी री प्यारी न्हायसी ओ, बठ शंकरलालजी भगवतीबाई आयसी
आवो ए बायां करो ए बधावणा जी, म्हार आज रो दिन रळी आव ज्यो
जंवायां र ओढ़ण घर रा गूदड़ा ओ, म्हारी बायां बेट्यां आरतो संजोय सी
(इस तरह बाई - जंवाई का नाम लेना)

आरता :

गाय गवाड़ स्यूं गोबर ल्याओ - 2
ओजी पीळी तो ल्याओ - सायब पोखरी
जल जमुना रो नीर मंगाओ
ओजी नीपो नी साळ र सायब ओबरो ।।
माणक मोत्यां रो चोक पुरावो
ओजी गादी तो ढाळो सायब रेशमी
जठ बैठ म्हारी कंवर लाडलड़ी
ओजी करोनी म्हारी भुवा बाई आरतो ।।

इण आरतड़ा म रोक रुपयो
ओजी और बधागरवाळी चुन्दड़ी
झूठा ननद बाई झूठ न बोलो
ओजी दोय टका रो बाई से आरतो
इसड़ी तो रीत भावज पीवरिया मं राखो
ओजी पीळी पीळी मोहरा, बाई रो आरतो।।
गाय गुवाड़, स्यूं गोबर ल्याओ
ओजी पीळी तो ल्याओ सायब पोखरी ।।

लख लेना (बनड़ा) :

लख ले रे म्हारा बाळक बनड़ा लख ले रे
ज्यू रे लखेसर होय, रायजादा बनड़ा लख ले रे
रूपो ले रे म्हारा बाळक बनड़ा रूपो ले रे
ज्यू रे रूपेसर होय रायजादा
तांबो ले रे म्हारा बाळक बनड़ा तांबो ले रे
ज्यूं रे तमेसर होय रायजाद ...
जीरो ले रे म्हारा बाळक बनड़ा जीरो ले रे
ज्यू रे जितेसर होय रायजादा ...
गुड़ ले रे म्हारा बाळक बनड़ा गुड़ ले रे
ज्यू रे गुणेसर होय रायजादा ...
अजमुं ले रे म्हारा बाळक बनड़ा अजमुं ले रे ज्यू रे
अजरावण होय रायजादा बनड़ा लख ले रे

सुहागण- कामण :

बनड़ी सुहाग मांगण चाली आप र, दादा र दरबार
लाडली सुहाग मांगण चाली आप र बाबा र दरबार
दादाजी देओनी सुहाग, बाबाजी देओनी सुहाग
आळी भोळी न सुहाग, अखन कुंवारी न सुहाग
पीवर पुरी न सुहाग, ए मां मैं क्या जाणु कामण ऐसा गुण लाग्या ।।
लाग्या लाग्या ओ राइबर, लाग्या लाग्या ओ सूरजमल
इंदली बीदंली स गुण लाग्या मेण मजीट स गुण लाग्या
काजळ टीकी स गुण लाग्या छल्ला बींटी स गुण लाग्या ।।
मेहंदी मोळी स गुण लाग्या, बनी थारो बनड़ो है नादान
दड़ीयां खेललो चोगान, पासा राळलो मैदान, गोखा बैठ्यो चाबलो पान
तोरण आयो करे सलाम, ए मां मैं क्या जाणु कामण ऐसो गुण लाग्यो
(इस प्रकार काका, भैया, मामा सभी का नाम लेना)

सेवरा (1) :

बाजारां में जातां गायड़मल न राव राजा पूछ जी राज
ओजी थांर सेवरां री भळक घणेरी
सेवरा कुण मुलाया जी राज।।
म्हार दादाजी रो श्रीरामजी नाम
म्हार दादाजी रो हरनारायणजी नाम
ओजी म्हारा सेवरा री भळक घणेरी सेवरा बे ही मुलाया जी राज।।

सेवरा (2) :

बन्ना काहेरी थारी दुवात लेखण, कुण थांन साळ पढ़ाइया
सोनारी म्हारी दुवात लेखण, दादोजी साळ पढ़ाइया
म्हारा दादोजी, दादोजी चतर सुजान
चत्तर साळ मं कंवर पढ़ाइया जी ।।
गूंथल्याई म्हारी मालण, रंग रंगीला छाप छपीला
बीच लगाय ल्याई हरी छड़ी
बागां म मीठा आम जमेरी औरज मीठी दाखड़ल्यां।।
सेजां म मीठा लाडु पेड़ा
और बन्नाजी री बातल्यां
रायजादा रे सोव सिर सेवरा
बाळक बनड़ा रे सोव सिर सेवरा ।।

गौर पूजना :

चढ़ चढ़ ए चैतड़ला र मास गोरल पूजो ना
थे तो दादी र पोती (पोता) गोरल पूजो ना
थे तो मांय र बेटी (बेटा) गोरल पूजो ना
थे तो काकी जेठूती (जेठूता) गोरल पूजो ना
थे तो नणद (देवर) भोजायां गोरल पूजो ना
चढ़ चढ़ ए चेतड़ला- गोरल पूजो ना।।

निकासी :

बनड़ो म्हारो लुळ लुळ पाछो जी जोव
जाण म्हारा दादाजी डूंगरमलजी जान पधार
जाण म्हारा बाबाजी श्यामसुन्दरजी जान पधार
जाण म्हारा बाबाजी जयकिशनजी जान पधार
जाण म्हारा काकाजी देवीप्रसादजी जान पधार
बनड़ो म्हारो लुळ लुळ पाछो जी जोव।।

बीरा - सेवरा:

बीराजी बाई रा सेवरड़ा भल देसी
लाडलड़ास्यूं पेली म्हारी लाडलड़ी ने देसी
लाडड़लो म्हारो अखी अजरावण होय ज्यो
लाडड़ली म्हारी सरब सुहागण होयज्यो
(इसी प्रकार सेवरा में मामा का नाम लेते हैं)

म्हारी सरब सुहागण बनड़ी फेरां जी बैठी :

म्हारी सरब सुहागण बनड़ी फेरां जी बैठी
पेलो तो फेरो लीन्यों लाडली ।।
पेलो फेरो तो लीन्यों बाई दूधांरी धाई
सखियां सराही बाई ने हेरती
बापूजी हरखंता डोले, मायड़ मिठड़ा सा बोले
आसिस तो देवे, बाई ने मोकळी ।।
जुग जीवो लाडेसर म्हारी सोनचिड़कली
जुग-जुग जीवो बनड़ो सूवटो
म्हारो सुवटो सैलानी, बनड़ी कोयल सुरग्यानी
मीठी वाणी बोले, घर रे आंगणे ।।
म्हारी अमर सुहागण बनड़ी फेरां जी बैठी
दूजो तो फेरो लीन्यों लाडली
दूजो फेरो तो लेतां बाई रा बाबाजी हरखै
हरखंता आंसू ढुळके नैण में
बाबाजी हरखंता डोले, बड़ियाजी घूंघट रे ओले
आसिस तो देवे बाई ने मोकळी ।।
थांने आंगण चुंघायो, बनड़ी दूधां न लाजे
सासू-सुसरां री करजे चाकरी
जुग जीवो ए बनड़ी, थारी अम्मर हो रखड़ी
हिंगळू सुहागण रोळी नित धुळे ।।
म्हारी बूढ़ सुहागण बनड़ी फेरांजी बैठी
तीजो तो फेरो लीन्यों लाडली
तीजो फेरो तो लेतां बीरो आसिसङी देवे
भावज होठां में मुळके, नैणा आंसूड़ा ढळके
भीजण तो लाग्यो, झींणो घूंघटो।।
औ तो मिठबोला वीरो-भावज, सबद सुणावे
भाग सरावे भोळी भांण को
जुग जीवो भायां री बेनड़ देवर लडायी
बूढ़ सुहागण होई सासरे ।।
म्हारी लाड लडावण बनड़ी फेरां जी बैठी
चौथो तो फेरो लीन्यो लाडली
चौथो फेरो ले बाई म्हारी हुई ए परायी
हरखावे समधी रो आंगणो ।।
म्हारे बागां चमेली-चंपा झुरझुर झांके
कूंळे कुम्हलायो, कंवळो केवड़ो
आ तो आंचळ उड़ाती, पुरवा लेखा तो लेवे
बगिया तिरसाई, बेगी बावड़ी
बेगी आई ए बाई, बिलखे भावज मां-बड़िया
भूल न जाई घर को बारणो भूल न जाई घर को बारणो ।।

चिरमठड़ी और केवड़ो :

म्हारे आंगण चिरमठड़ी रो रूख म्हारा पिवजी
कोई समधी रे आंगण केवड़ो जी
फूल्यो फूल्यो चिरमठड़ी रो रूख म्हारा पिवजी
कोई महकण लाग्यो केवड़ो जी।।
दोन्यू समधी बेठ्या जाजम ढाळ म्हारा पिवजी
कोई चोपड़ पासा ढाळीया जी
पूछ पूछ राजकुंवर री मांय म्हारा पिवजी
कोई कुण हाऱ्या कुण जीतिया जी
हार्या हाऱ्या राजकुंवर रा बाप धणगोरी
कोई कोठण समधी जीतिया जी।।
घुड़ला मांयला घुड़ला क्यू नहीं हाऱ्या म्हारा पिवजी
म्हारी राजकुंवर क्यूं हारिया
घुड़ला देस्यां राजकुंवर र दात म्हारी गोरीधण
ज्यूं घर सोह आपणू जी
डब्बा मांयला गेणा क्यूं नहीं हार्यो म्हारा पिवजी
म्हारी राजकुंवर क्यूं हारिया जी
गेणा देस्यां राजकुंवर र दात म्हारी गोरीधण
ज्यूं घर सोह आपणू जी।।
पायो पायो भैंसड़ल्यां रो दूध म्हारा पिवजी
कोई मांय पतासा घोलियाजी
म्हारी लाडो, मोत्यां बिचली लाल, म्हारा पिवजी
कोई दूध पाय मोटी करी
म्हारी राजकुंवर क्यूं हारिया जी
राजकुंवर छै, सात भायां री बेहन म्हारा पिवजी
ऊबी सोह आंगणे जी
म्हारी राजकुंवर क्यूं हारिया जी।।
पेली हार्या तीन भुवन रा नाथ म्हारी गोरीधण
कोई दूजां हार्यो थारो बाप म्हारी गोरीधण

कोई पीछे म्हे भी हारिया जी ।।
उठ म्हारी बाई, कर सोलह सिणगार, म्हारी कंवरी
पेहर पटोळो, ओढ़ दुरंगों, जाओ म्हारी कंवरी

थारा बाबोजी बचना हारिया जी।।
घर सूनो कर चाली म्हारी बनड़ी जीवड़ो उजीयो रेय रेय जी
जीवड़ो कायर मत कर म्हारा मनड़ा
कोई आ ही जगत री रीत जी।।

गठजोड़ो :

म्ह तो बाबल रे बागां री चिड़कली (2)
परदेशी सुवटिये रे लार, बाबल गठजोड़ो कर्यो । टेर।।
दादाजी खूब रुखाली म्हारी कोटड़ियां
बाबाजी खूब रुखाली म्हारी कोटड़ियां
दादीजी खूब खिलाया म्हांने गोद
बाबल गठजोड़ो कर्यो ।। टेर।।
म्ह तो संग री सहेल्यां रळ खेलती (2)
बिरोजी घणी तो पूजायी गणगौर
बाबल गठजोड़ो कर्यो ।। टेर।।
म्ह तो मां र खंदोले चढ़ घूमती (2)
मामीजी सुलझाया उळझ्योड़ा केश
बाबल गठजोड़ो कर्यो । टेर
भावज खूब रचायी हाथां राचणी (2)
भूवाजी घणा ही लडाया म्हांने लाड
बाबल गठजोड़ो कर्यो । टेर।।
बाबल छोड़ चली थारो आंगणियों (2)
मायड़ छोड़ चली थारो चून बाबल गठजोड़ो कर्यो ।। टेर।।
बीरोजी नित ही जोवूंली थारी बाटड़ली (2)
लेवण आइज्यो सावणिये री तीज
बाबल गठजोड़ो कर्यो । टेर।।

चाली बाई सासरिये :

चाली बाई सासरिये
चढ़ी बाई सासरिये(2)
कोयल ऐ कोयल भेनड़, पिवु पिवु बोल (2)
चढ़ती बाई न शब्द सुणायजे (2)
डूंगर रे डूंगर बाबा, नीचो झुक जाय (2)
चढ़ती बाई री दीखे चूनड़ी (2)
सूरज रे सूरज राजा मोड़ो उग जाय (2)
चढ़ती बाई न होसी तावड़ो (2)
बादली ऐ माता म्हारी सूरज सामी आय (2)
चढ़ती बाई रो चिलक चूड़लो (2)
बायरा रे बायरा भाया धीमो मदरो बाज (2)
चढ़ता जंवाई रो ठहरे मोलियो (2)
कोयल ऐ कोयल भेनड़, पिवु पिवु बोल (2)
चड़ती बाई न शब्द सुणायजे (3)

बारात वापस आने पर (बीन के घर) :

कठोड़ मे बाजा, म्हारा दुलवा, बाजिया जी
कठोड़ में घुरया छ निशाण, परण पधारयो, म्हारो दूलवो, बिनणीजी ।।
मे जसवन्तगढ़ म बाजा म्हारी सैयां बाजिया जी
मुम्बई म घुरया छ निशान, परण पधारयो, म्हारो दुलवो, बिनणीजी।।
किसड़ो तो लाग्यो, म्हारा दुलवा, सासरोजी
कितरा साळांरी जी जोड़, परण पधारयो, म्हारो दुलवो, बिनणीजी
समन्द सरीसो, म्हारी सैयां सासरो जी, सात साळांरी जी जोड़... परण...
किसड़ी तो लागी, म्हारा दुलवा बिनणीजी, किसड़ी तो करी मनुहार ... परण...
कान संवाणी म्हारी सैयां बिनणीजी, दीनी छ दोवड़ दात ... परण...
दात उतारो, म्हारी सैया डागळजी, बिनणी झरोखा र माय... परण ।।

थालेड़ी

ना खड़काई, ना भड़काई सासु बुवां री हुवली लड़ाई ।।
ना खड़काई, ना भड़काई देवर जेठाण्यां री हुवली लड़ाई ।।
ना खड़काई, ना भड़काई नणद भोजायां री हुवली लड़ाई ।।

बहू को परिवार परिचय :

म्हारी बवड़ हेलो पाड़ ए, घनश्यामचन्द्रजी दादेसुसरा मांग ए
म्हारी बवड़ हेलो पाड़ ए, सीतादे दादेसासु मांग ए
म्हारी बवड़ हेलो पाड़ ए, श्रीरामजी बड़ेसुसरो मांग ए
म्हारी बवड़ हेलो पाड़ ए, सुमनदे बड़ियासासु मांग ए
(इसी तरह सब घरवालों के नाम लेना)

घी गुड़ में हाथ घलाणा :

सासुजी लाड लडावजी-घी गुड़ म हाथ घलाव जी
(इसी तरह सब घरवालों के नाम लेना)

मायां उठाना :

उठो-उठो मायां, घी गुड़ मायां
कुणजी मायां री भगती कराव
कुणजी लुळ- लुळ पांव जी लाग
नवीनकुमारजी मायां री भगती कराव
बहू नीरादे ओ लुळ लुळ पांव जी लाग
उठो-उठो मायां ।।

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